Thursday, May 20, 2010

माँ के हाथ का खाना छप्पनभोग से भी अच्छा लगता है




बेटा
कितना भी बड़ा होजाए
माँ के सामने बच्चा लगता है
माँ के हाथ का खाना
छप्पनभोग से भी अच्छा लगता है

मैंने अपनी पत्नी से कहा भाग्यवान !
तू रोटियां मेरी माँ जैसी बना दिया कर

वो बोली
बना दूंगी ,
तू आटा अपने बाप जैसा गूँथ दिया कर

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5 comments:

  1. हा...हा...हा...मजेदार

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  2. पत्नी जी ने पूछा कि आप इतना बढ़िया खाना बनाते हो ...किससे सीखा है.?.पति देव बोले..पिताजी से...

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  3. अद्-भुत हैं आपके सभी प्रयास। बहुत खूब। आप ने कुछ समय पहले मे्रा ब्लोग देखा आपके प्रेरणापूर्ण शब्दों के लिये हार्दिक धन्यवाद।
    -मीना

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