Tuesday, February 23, 2010

गुरू और नारी के प्रति की गई धृष्टता कभी क्षमा नहीं होती




इतिहास साक्षी है

हमारे शास्त्र भी प्रमाण देते हैं

कि ईश्वर की बनायी इस सृष्टि में

नारी का दर्जा बहुत ऊँचा है



संभव है

परमात्मा

अपने प्रति किये गये हमारे अपराध

क्षमा कर दे

परन्तु

गुरू और नारी के प्रति की गई धृष्टता

कभी क्षमा नहीं होती



इसलिए श्रेष्ठ यही है कि हम

देवी स्वरूपा नारी का सम्मान करें

और इसकी रक्षा -सुरक्षा करें






















www.albelakhatri.com

12 comments:

  1. बिल्कुल सही

    लेकिन नीचे लिख भी देना था

    **नियम व शर्तें लागू

    बी एस पाबला

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  2. Nice
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  3. Bahut khoob!Lekin naree ko insaan samajhen..devee na banayen, itnahi kaafee hai!

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  4. kshama se mai sahmat hoo.........

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  5. --बस हास्य में न लें ।

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  6. यह तो सही है..पर बेचारे पुरुषों का कोई पक्ष लेगा कभी....शरीफ पुरुष क्या सिर्फ पीटने के लिए ही पैदा हुए हैं..

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  7. bahut achha kaha hai albela jee.....

    khuda ne sirf aurton ko naslon ka amanatdaar banane ki sifat bakshee hai

    mubarak achhe lekh ke liye .....

    please visit at kalaam-e-chauahn.blogspot.com

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  8. NADI (Istri) sachmuch pujniye hai inka sammaan to samuchya deshwashiyon karana hi chahiyr

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  9. अलबेला भाई . उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई ।

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